हम चार साथी ३०सितम्बर०८ से 08 अक्तूबर2008 के बीच हर की दून की ट्रेक्किंग के दौरान स्वर्गारोहिणी शिखर की तलहटी और जौन्धार हिमनद के मुहाने तक सफलतापूर्वक होकर आए। पैदल मार्ग में अनेक स्थानों पर भयंकर भूस्खलन के फलस्वरूप पैदल मार्ग लुप्तप्राय होने के कारण यात्रा में हमें बहुत कठिनाई हुई.
पैदल यात्रा मार्ग के प्रत्येक पड़ाव पर गढ़वाल मण्डल विकास निगम की ओर से भोजन-शयन की व्यवस्था होने के कारण यात्रा सुविधाजनक हो सकी है. इस यात्रा के दौरान बिजली-फोन आदि का नामो-निशाँ न मिलने से लगता है कि हम आदिम युग में विचर रहे हैं.
मार्ग बेहद थकाने वाला था, किंतु स्वर्गारोहिणी शिखर के चरणों में पहुँच कर जो भव्य द्रश्य हमारे सामने था, उसे देख सारी थकान जाती रही।
पैदल यात्रा मार्ग के प्रत्येक पड़ाव पर गढ़वाल मण्डल विकास निगम की ओर से भोजन-शयन की व्यवस्था होने के कारण यात्रा सुविधाजनक हो सकी है. इस यात्रा के दौरान बिजली-फोन आदि का नामो-निशाँ न मिलने से लगता है कि हम आदिम युग में विचर रहे हैं.
मार्ग बेहद थकाने वाला था, किंतु स्वर्गारोहिणी शिखर के चरणों में पहुँच कर जो भव्य द्रश्य हमारे सामने था, उसे देख सारी थकान जाती रही।
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